Shukra Chalisa Lyrics
श्री शुक्र चालीसा
॥दोहा॥
श्री गणपति गुरु गउ़रि, शंकर हनुमत कीन्ह।
बिनवउं शुभ फल देन हरि, मुद मंगल दीन॥
॥चौपाई॥
जयति जयति शुक्र देव दयाला।
करत सदा जनप्रतिपाला॥
श्वेताम्बर, श्वेत वारन, शोभित।
मुख मंद, चंदन हिय लोभित॥
सुन्दर रत्नजटित आभूषण।
प्रियहिं मधुर, शीतल सुवासण॥
सप्त भुज, सोभा निधि लावण्य।
करत सदा जन, मंगल कान्य॥
मंगलमय, सुख सदा सवारथ।
दीनदयालु, कृपा निधि पारथ॥
शुभ्र स्वच्छ, गंगा जल जैसा।
दर्शन से, हरषाय मनैसा॥
त्रिभुवन, महा मंगल कारी।
दीनन हित, कृपा निधि सारी॥
देव दानव, ऋषि मुनि भक्तन।
कष्ट मिटावन, भंजन जगतन॥
मोहबारी, मनहर हियरा।
सर्व विधि सुख, सौख्य फुलारा॥
करत क्रोध, चपल भुज धारी।
कष्ट निवारण, संत दुखारी॥
शुभ्र वर्ण, तनु मंद सुहाना।
कष्ट मिटावन, हर्षित नाना॥
दुष्ट हरण, सुजनन हितकारी।
सर्व बाधा, निवारण न्यारी॥
सुर पतिहिं, प्रभु कृपा विलासिन।
कष्ट निवारण, शुभ्र सुवासिन॥
वेद पुरान, पठत जन स्वामी।
मनहरण, मोहबारी कामी॥
सप्त भुज, रत्नजटित माला।
कष्ट निवारण, शुभ फलशाला॥
सुख रक्षक, सर्वसुख दाता।
सर्व कामना, फल दाता॥
मानव कृत, पाप हरे प्रभु।
सर्व बाधा, निवारण रघु॥
रोग निवारण, दुख हरणकर।
सर्व विधि, शुभ फल देनेकर॥
नमन सकल, सुर नर मुनि करते।
व्रत उपासक, दुख हरण करते॥
शरणागत, कृपा निधि सोइ।
जन रक्षक, मोहे दुख होई॥
शुद्ध भाव, से जो नित गावै।
सर्व सुख, परम पद पावै॥
वृन्दावन में, मंदिर निर्मित।
जहां शुद्ध भक्तन, सदा शरणागत॥
संत जनन के, कष्ट मिटावत।
भवबंधन से, सहज छुड़ावत॥
सकल कामना, पूर्ण करावत।
मोहभंग, भवसागर तरावत॥
जयति जयति, कृपानिधान।
शुक्र देव, श्री विश्व विद्धान॥
प्रणवउं, नाथ सकल गुण सागर।
विविध विघ्न हरन, सुखदायक॥
सुर मुनि जनन, अति प्रिय स्वामी।
शुभ्र वर्ण, रूप मनहारी॥
जय जय जय, श्री शुक्र दयाला।
करहुं कृपा, भव बंधन ताला॥
ध्यान धरत, जन होउं सुखारी।
कृपा दृष्टि, शांति हितकारी॥
अधम कायर, सुबुद्धि सुधारो।
मोह निवारण, कष्ट निवारो॥
लक्ष्मीपति, शुभ फल दाता।
संतजनन, दुख भंजन राता॥
जय जय जय, कृपा निधि शुक्र।
करहुं कृपा, हरहुं सब दु:ख॥
प्रणवउं नाथ, सकल गुण सागर।
विविध विघ्न हरन, सुखदायक॥
रूप तेज बल, संपन्न सदा।
शांति दायक, जन सुख दाता॥
त्रिभुवन में, मंगल करतू।
सर्व बाधा, हरता शुकृ॥
मानव कृत, पाप हरे प्रभु।
सर्व बाधा, निवारण रघु॥
रोग निवारण, दुख हरणकर।
सर्व विधि, शुभ फल देनेकर॥
प्रणवउं नाथ, सकल गुण सागर।
विविध विघ्न हरन, सुखदायक॥
ध्यान धरत, जन होउं सुखारी।
कृपा दृष्टि, शांति हितकारी॥
जय जय जय, कृपा निधि शुक्र।
करहुं कृपा, हरहुं सब दु:ख॥
॥दोहा॥
नमो नमो श्री शुक्र सुहावे।
सर्व बाधा, कष्ट मिटावे॥
यह चालीसा, जो नित गावै।
सुख संपत्ति, परम पद पावै॥
|| इति संपूर्णंम् ||
Shukra Chalisa Meaning
Write a simple explanation of the Chalisa here. This section can include verse-by-verse meaning, devotional context, and the qualities of Shukra Dev.
Benefits of Shukra Chalisa
- Helps create focus and devotion during daily prayer.
- Can be recited during vrat, pooja, festivals, and personal sadhana.
- Supports remembrance of Shukra Dev and the teachings connected with this path.
Shukra Chalisa Path Vidhi
- Clean the pooja place and sit calmly before starting.
- Light a diya and offer flowers, water, or prasad as per your tradition.
- Recite the Chalisa with a steady mind and complete it with a short prayer.
Shukra Chalisa FAQs
How should I read Shukra Chalisa?
Sit in a clean and calm place, light a diya if possible, remember Shukra Dev, and recite the Chalisa with devotion and a steady mind.
What are the benefits of Shukra Chalisa?
Regular recitation supports devotion, focus, positive thinking, and remembrance of the teachings and blessings connected with Shukra Dev.
Is audio available for Shukra Chalisa?
When an MP3 file is available in the Chalisa audio folder, this page shows an audio player. Related devotional listening links are also provided.